ध्यान करें

बैठें, साँस लें, वर्तमान में रहें

आपके जप से पहले या बाद का एक शांत स्थान। समय, साँस और ध्वनि चुनें, शुरू करें दबाएँ, और वृत्त को अपने साथ साँस लेने दें।

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दूसरे पर जाने से पहले एक को एक सप्ताह आज़माएँ।

साँस पर ध्यान

बस आती-जाती साँस को देखें। मन भटके तो ध्यान दें, और लौट आएँ।

सो हम्

एक पारंपरिक श्वास मंत्र: साँस लेते समय मन में ’सो’ और छोड़ते समय ’हम्’ सुनें। इसका अर्थ अक्सर ’मैं वही हूँ’ बताया जाता है।

ॐ

हर बार साँस छोड़ते समय धीरे से ॐ का जप करें, फिर उसके बाद के मौन में विश्राम करें।

बॉक्स श्वास

4 तक अंदर, 4 तक रोकें, 4 तक बाहर, 4 तक रोकें। एक स्थिर, समान लय जो व्यस्त मन को शांत करती है।

विश्राम श्वास

4 तक अंदर, 7 तक रोकें, 8 तक बाहर। एक धीमी लय जिसे कई लोग सोने से पहले अपनाते हैं।

पहले जप, फिर बैठें

वृत्त पर अपना मंत्र गिनें, फिर माला पूरी होने पर कुछ मिनट मौन में विश्राम करें।

ध्वनि और प्रार्थना

ध्वनि ने हमेशा प्रार्थना को आगे बढ़ाया है

संगीत सभागारों से बहुत पहले लोगों ने पाया कि सुर, लय और स्थिर साँस बेचैन मन को शांत कर सकते हैं। भारत में ध्वनि (वाक्, नाद) को पवित्र माना गया, और जप, गायन और श्रवण स्थिरता के मार्ग बने।

इसीलिए यहाँ की पृष्ठभूमि ध्वनियाँ सरल हैं: एक स्वर, एक घंटी, पानी, बारिश। कुछ ऐसा जिस पर टिका जाए, जिसके पीछे भागा न जाए।

  1. वैदिक काल

    सामवेद

    ऋग्वेद तीन स्वरों में पढ़ा जाता है। सामवेद अपनी कई ऋचाओं को सुर में ढालता है, जिन्हें यज्ञ में उद्गाता पुरोहित अधिक स्वरों में गाते हैं। भारतीय परंपरा इन गानों (सामन्) को अपने शास्त्रीय संगीत की जड़ मानती आई है।

  2. योग ग्रंथ

    नाद योग, ध्वनि का योग

    नाद ब्रह्म, ’संसार ध्वनि है’, भारतीय चिंतन में गहराई से बसा है। हठ योग प्रदीपिका नादानुसंधान का वर्णन करती है: पहले बाहरी ध्वनि सुनना, फिर सूक्ष्म भीतरी ध्वनि (अनाहत नाद), जब तक मन उसमें लीन न हो जाए। वीणा और मानव स्वर ध्यान के साधन बने।

  3. श्रमण परंपराएँ

    जैन और बौद्ध पाठ

    जैन साधना में नवकार मंत्र, स्तोत्रों और स्तवनों का, और बौद्ध साधना में सुत्तों और रक्षा पाठों का स्थिर, छंदबद्ध पाठ मन को एक लय देता है जिस पर वह टिक सके और लौट सके।

  4. भक्ति संत

    कीर्तन और भजन

    मीराबाई और तुलसीदास से लेकर तुकाराम के वारकरी अभंगों तक, भक्ति संतों ने भक्ति को गीतों में पिरोया, जिन्हें गाँवों और मंदिरों में लोगों की अपनी भाषाओं में मिलकर गाया जाता था।

  5. सिख गुरु

    गुरबाणी कीर्तन

    गुरु नानक देव जी अपने शबद भाई मरदाना के रबाब के साथ गाते थे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी 31 मुख्य रागों में रागबद्ध है, और कीर्तन आज भी हर गुरुद्वारे के केंद्र में है।

  6. दुनिया भर में

    एक साझा मानवीय प्रवृत्ति

    यूनानी विचारकों ने ’मूसिके’ को आत्मा में सामंजस्य लौटाने वाला बताया। ईसाई मठों ने प्लेनचैंट विकसित किया, और उपमहाद्वीप की सूफ़ी परंपराओं से क़व्वाली निकली। हर जगह लोगों ने पाया कि ध्वनि मन को स्थिरता की ओर ले जा सकती है।

बैठने से पहले

चार आसान सुझाव

1आराम से बैठेंज़मीन या कुर्सी पर, रीढ़ सीधी पर ढीली।
2एक ही समय, एक ही जगहरोज़ की छोटी आदत, कभी-कभार की लंबी बैठक से तेज़ बढ़ती है।
3छोटे से शुरू करेंपाँच मिनट काफ़ी हैं। और तभी बढ़ाएँ जब सहज लगे।
4मन के प्रति दयालु रहेंभटकना सामान्य है। हर बार लौटना ही साधना है।
प्रार्थना का अनुरोध

जो प्रार्थना ढूँढ रहे थे, वह नहीं मिली?

झटपट जवाब

ध्यान के सवाल

बैठने से पहले छोटे जवाब।

शुरुआत करने वाले को कितनी देर ध्यान करना चाहिए?

रोज़ एक ही समय और जगह पर 5 से 10 मिनट से शुरू करें। रोज़ की छोटी बैठक कभी-कभार की लंबी बैठक से जल्दी आदत बनाती है।

सो हम् ध्यान क्या है?

सो हम् एक पारंपरिक श्वास मंत्र है। साँस लेते समय मन में ’सो’ और छोड़ते समय ’हम्’ सुनें। इसका अर्थ अक्सर ’मैं वही हूँ’ बताया जाता है।

4-7-8 श्वास क्या है?

4 गिनती तक साँस लें, 7 तक रोकें और 8 तक छोड़ें। इसे डॉ. एंड्रयू वील ने योग के प्राणायाम से लोकप्रिय बनाया, और कई लोग सोने से पहले आराम के लिए इसे अपनाते हैं।

बॉक्स श्वास क्या है?

4 तक साँस लें, 4 तक रोकें, 4 तक छोड़ें और 4 तक रोकें। यह समान लय व्यस्त मन को शांत करने में मदद करती है।

क्या मैं जप के बाद ध्यान कर सकता हूँ?

हाँ। ’पहले जप, फिर बैठें’ मोड में हर जप पर वृत्त टैप करें, और माला पूरी होते ही घंटी बजती है और कुछ मिनट का मौन अपने आप शुरू हो जाता है।

क्या यह ध्यान टाइमर मुफ़्त है?

हाँ। यह बिना कुछ इंस्टॉल किए आपके ब्राउज़र में चलता है, और आपकी बैठकें आपके अपने डिवाइस पर सहेजी जाती हैं।